टूटा फूटा मकान, है तो सही ।
अपने घर का गुमान है तो सही।।
रोशनी थोड़ी छन के आती है।
धुँधला सा रौशदान है तो सही !!
सब्र पे सब्र पिए जाता हूँ ।
हाथ में कोई जाम है तो सही !
ज़िल्द को खा चले हैं अब दीमक ।
बिखरे पन्ने तमाम हैं तो सही !
आज वो साथ नहीं है तो क्या !
उसके किस्से तमाम हैं तो सही !!
चलते जाते हैं, सफ़र खत्म नहीं होता है।
शुक्र है साथ कोई राज़दान है तो सही !!