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Ghazal

तेरे ग़म से दूर जाना चाहता हूँ..!!

अब मैं तुझको भूल जाना चाहता हूँ
तेरे ग़म से दूर जाना चाहता हूँ !

रोशनी आख़िर मिलेगी तेरी कब तक!
अपनी लौ से जगमगाना चाहता हूँ !!

तू नहीं है ज़िंदगी में ये गलत है !
फिर भी दिल को सच दिखाना चाहता हूँ!!

बे -सहारा, बे -अलम, बे-जीस्त होकर ।
शून्य में जीवन बिताना चाहता हूँ ..!

सोचता हूँ मैं भी अब थोड़ा जिऊँगा..!
ये यकीं खुद को दिलाना चाहता हूँ ..!!

बस बहोत बर्बादियों से कर ली यारी ।
अब मैं गुलशन को सजाना चाहता हूँ..!!

एक ख्वाहिश है अधूरी भी तो क्या है ..!
हर तमन्ना अब मिटाना चाहता हूँ..!!
आशुतोष त्रिपाठी

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