अब मैं तुझको भूल जाना चाहता हूँ
तेरे ग़म से दूर जाना चाहता हूँ !
रोशनी आख़िर मिलेगी तेरी कब तक!
अपनी लौ से जगमगाना चाहता हूँ !!
तू नहीं है ज़िंदगी में ये गलत है !
फिर भी दिल को सच दिखाना चाहता हूँ!!
बे -सहारा, बे -अलम, बे-जीस्त होकर ।
शून्य में जीवन बिताना चाहता हूँ ..!
सोचता हूँ मैं भी अब थोड़ा जिऊँगा..!
ये यकीं खुद को दिलाना चाहता हूँ ..!!
बस बहोत बर्बादियों से कर ली यारी ।
अब मैं गुलशन को सजाना चाहता हूँ..!!
एक ख्वाहिश है अधूरी भी तो क्या है ..!
हर तमन्ना अब मिटाना चाहता हूँ..!!
आशुतोष त्रिपाठी