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Poetry

नया वर्ष..

पिछले अनुभव से सीख के कुछ
अगले पल में कुछ नया करें ।

हम उन्नति को संकल्पित हो
कुछ सृजन यहां पर नया करें !

कुछ बीते पल से सीख के हम
अगले पल का निर्माण करें ‘!

अब नये वर्ष की बेला में
हम नयी प्रकृति में प्राण भरें ।

अब तक लेना ही सीखा है ,
कुछ देना भी अब सीखें हम !!

अब तक तो जीतना सीखा है
औरों को जिताना सीखे हम ।

इस कोमल वसुंधरा का भी
हम पर कुछ कर्ज निकलता है ।

माँ पिता और गुरुजन पर भी
अपना कुछ फर्ज निकलता है !

अब सबका कर्ज चुकायें हम
बस अपना फर्ज निभायें हम ।

मधुमय यह नया वर्ष होवे
सुखमय यह नया वर्ष होवे !!

”आशुतोष त्रिपाठी ”