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Poetry

माँ

है स्वर्ग जो कहीं तो, कदमों में माँ है तेरे !
है जो कहीं तसल्ली, आँचल में माँ है तेरे !!

तूफ़ान से ग़मों के, जब भी मैं हार जाता ।
साया तेरा हर ग़म से, मुझको उबार लाता !

लाखों जतन किये हैं, माँ तूने मेरी ख़ातिर!
तुझ सा न और कोई, दुनियाँ में पाक नाता !!

गर है ख़ुदा जहाँ में, वो भी है तुझसे छोटा !
तू रूह में बसी है, वो तो है बस ज़ेहन में !!

जन्न्त तो नहीं देखी, पर ये मैं जानता हूँ ।
तेरी गोद को मैं, जन्न्त से बढ़ के मानता हूँ !

उम्र-ए-तमाम चल के अब, थक गया हूँ मैं माँ !
अब तो सुकूँ मिलेगा, आँचल में ही माँ तेरे !!

है स्वर्ग जो कहीं तो, कदमों में माँ है तेरे ..!!

आशुतोष त्रिपाठी
१०/०५/२०२०
मातृ दिवस

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