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Poetry

हौसले भी कम नहीं थे..

हौसले भी कम नही थे, ना इरादों में कमी थी।
भूख से लेकिन लड़े, वो इतना ताकतवर नहीं था।


सर छुपाता भी कहाँ से, संगदिल तूफान में वो।
रास्ते में सौ महल थे, उसका अपना घर नहीं था।।

नींद में चलने की आदत, उसको थी शायद पुरानी।
पर वो थक कर सो गया हो, ऐसा कोई पल नहीं था।।

पावँ के छाले दिखाता भी, तो वो कैसे दिखाता ।
उनपे जो मरहम लगाए, ऐसा भी रहबर नहीं था ।।
आशुतोष त्रिपाठी !
“आशु”