किसी के हो सको, तो इतना-सा सबर रखना।
उसकी मज़बूरियों की, तुम भी कुछ खबर रखना!
ज़रा सी बात पे यूँ , छोड़ कर न चल देना ..।
जो हाथ थाम लिया, साथ उम्र भर रखना…!
बड़े नसीब से मिलता है, कोई अपना सा।
बहोत नसीब से बनता है, कोई सपना सा।
किसी के हो न सको गर, तो कोई बात नहीं
मगर जो हो गए, तो साथ रहगुज़र रखना !
किसी के हो सको तो……
नया ज़माना है, माना नए ख़याल भी हैं..
ज़िन्दगी के, बड़े मासूम से सवाल भी हैं।
ग़मो से भाग के जी पाया है भला कोई?
जो राह चुन ली उस पे, पावँ भी डटकर रखना!
तुम्हे मिलेंगे नए शहर, नए गाँव, नए लोग मगर ।
हर एक कदम पे बदल जाएँगे, मौसम भी मगर ।।
तुम्हारी जीस्त जो है, उसको बरकरार रखो…!
राह-ए-उल्फत में हर कदम सम्हालकर रखना ..!!
किसी के हो सको तो इतना सा सबर रखना…!
“आशुतोष त्रिपाठी”
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