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एक नई शुरुआत…

एक नई शुरुआत करनी है मुझे….

आ कि तुझसे बात करनी है मुझे !
एक नई शुरुआत करनी है मुझे..
प्यार, नफरत,गुस्सा , खुशी, बेवजह है झूठ है..
लोग समझें जो ज़ुबाँ, वो बात करनी है मुझे..!

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Nazm

मुक्तक ….

मेरी लिक्खी ग़ज़ल कोई, तुझे जब याद आएगी।
वो अपने साथ मेरी हर, कहानी गुनगुनायेगी . ।।
तेरे नैनों से झर- झर जो बहे, आँसू समझ लेना !!
कसक तेरे कलेजे की, मुझे भी तो रुलायेगी … !

वफ़ा की बात पर अक्सर, मैं तेरा नाम लेता हूँ!
कभी ये सोचना भी मत, तुझे इल्ज़ाम देता हूँ..!!
नसीबों में नहीं था, इश्क़ का परवान चढ़ जाना ।
यही सब सोच कर, आखिर में दिल को थाम लेता हूँ!!

कभी मेरा चले आना, कभी तेरा बुला लेना… !
निगाहों ही निगाहों में, तेरा सब कुछ बता देना.!!
मैं अब भी टूट जाता हूँ, कभी जब याद आता है।
मेरी खातिर, वो तेरा सैकड़ों तोहमत उठा लेना !

वो किस्से इश्क़ के अपने, जो अक्सर आम होते थे।
मेरे दिन रात जब अक्सर, तुम्हारे नाम होते थे.!
मैं बा-अफ़सोस, उन गलियों को, ख़ुद ही छोड़ आया हूँ।
जहाँ पौधों के पत्तों पर, हमारे नाम होते थे…..!!

“आशुतोष त्रिपाठी”

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Nazm

वक़्त को उस से कुछ गिला तो था

वक़्त को उस से कुछ गिला तो था,
वरना उस रोज़ वो मिला तो था ..!

लोग कहते हैं अब वो तन्हा है ..?
साथ मे उसके काफिला तो था ..!

शायद इसको ही जीस्त कहते हैं,
एक रोटी का मामला तो था ..!

नफ़रतें प्यार में बदलीं न कभी ..
अच्छा खासा घुला मिला तो था ..!

बिन पिये रिन्द का यूँ लौट आना ..?
आज मैखाना भी खुला तो था …!
“आशुतोष त्रिपाठी”