पिछले अनुभव से सीख के कुछ
अगले पल में कुछ नया करें ।
हम उन्नति को संकल्पित हो
कुछ सृजन यहां पर नया करें !
कुछ बीते पल से सीख के हम
अगले पल का निर्माण करें ‘!
अब नये वर्ष की बेला में
हम नयी प्रकृति में प्राण भरें ।
अब तक लेना ही सीखा है ,
कुछ देना भी अब सीखें हम !!
अब तक तो जीतना सीखा है
औरों को जिताना सीखे हम ।
इस कोमल वसुंधरा का भी
हम पर कुछ कर्ज निकलता है ।
माँ पिता और गुरुजन पर भी
अपना कुछ फर्ज निकलता है !
अब सबका कर्ज चुकायें हम
बस अपना फर्ज निभायें हम ।
मधुमय यह नया वर्ष होवे
सुखमय यह नया वर्ष होवे !!
”आशुतोष त्रिपाठी ”